मध्यप्रदेश में शहरों और शहरीकरण का बहुत पुराना इतिहास हैं। आजादी के पूर्व इंदौर, भोपाल, रीवा, जबलपुर और ग्वालियर बड़े शहरों के तौर पर स्थापित थे।

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मध्यप्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर शहर में 1866 में नगरपालिका स्थापित हो गई थी। इसी दौर में जबलपुर और सागर में नगर पालिकाएं स्थापित हो गई थीं। तब से लेकर आज तक राज्य में नगरीय संस्थाएं खूब फली- फूली, लेकिन एक बात एक जैसी रहीं, तब भी शहर अपने इलाके की व्यावसायिक, सामाजिक और सांस्कृतिक
केंद्रों के तौर केंद्र हुआ करते थे और आज भी हैं।



2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में नगरो की संख्या 476 थीं।इसके मुक़ाबले 2001 की जनगणना में नगरो की संख्या 394 थीं।

इस तरह राज्य में 10 सालों के दौरान 83 की वृद्धि हुई।
इसी तरह राज्य में 2001 में सर्वाधिक नगरो की संख्या 339 थीं। जो 2011 की जनगणना के समय 364 हो गई।



इसी तरह राज्य में 2001 में हुई जनगणना के मुताबिक नगरो की संख्या 55 थीं। जिनकी संख्या बढ़कर 2011 की जनगणना के समय, 112 हो गई।


2011 की जनगणना के समय जहां राज्य की कुल आबादी 7,25,97,565 थीं।
इसमें नगरीय आबादी का आकार 2,00,59,666 दर्ज किया गया।

(१) जनसंख्या का अनुपात :- 2011 की जनगणना के दौरान राज्य की कुल जनसंख्या में, नगरीय क्षेत्र की जनसंख्या का अनुपात 27.6 फ़ीसदी दर्ज़ किया गया।इस तरह देखा जाए तो राज्य की लगभग एक चोथाई से ज्यादा आबादी नगरीय क्षेत्रों में निवास करती हैं।
नगरीय जनसंख्या का सर्वाधिक अनुपात 80.8 प्रतिशत भोपाल जिले में दर्ज़ किया गया।



(२) वृद्धि दर :- 2001- 2011 की जनगणना के दौरान राज्य के नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि दर 25.6 रहीं। राज्य में नगरीय जनसंख्या के संदर्भ में सर्वाधिक वृद्धि दर रायसेन जिले में 46.8 दर्ज़ की गई।


(३) स्त्री - पुरुष अनुपात :- 2001 से 2011 के बीच राज्य की नगरीय आबादी में 4,092,521 वृद्धि दर्ज़ की गई।
2011 में राज्य के नगरीय इलाकों में स्त्री- पुरष अनुपात 916 दर्ज़ किया गया।
जबकि मध्यप्रदेश का ओसत स्त्री- पुरष अनुपात 930 है।
बालाघाट जिले में 2011की जनगणना के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की ही भांति नगरीय क्षेत्रों में सर्वाधिक स्त्री- पुरष अनुपात 999 दर्ज़ किया गया।
मुरैना जिले के नगरीय क्षेत्र में राज्य में, सबसे कम स्त्री- पुरष अनुपात 858 दर्ज़ किया गया।

(४) बच्चों की संख्या (0-6) :- 2001 की जनगणना के दौरान राज्य के नगरीय क्षेत्रों में बच्चों की संख्या 2.4 दर्ज़ की गई। पिछले दशक की तुलना में बच्चों की जनसंख्या में 2.6 प्रतिशत की कमी दर्ज़ की गई।

(५) शिशु लिंगानुपात (0-6) :- 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य के नगरीय क्षेत्रों में सर्वाधिक अनुपात डिंड्डोरी जिले में 981 दर्ज़ किया गया।
जबकि सबसे कम मुरैना जिले में 822 पाया गया।

(६) स्थानीय निकाय :- राज्य के नगरीय क्षेत्रों को प्रशासित करने के लिए राज्य में कुल 379 नगरीय स्थानीय निकाय हैं। इनमे 16 नगर पालिका निगम, 98 नगर पालिका परिषद्, और 265 नगर परिषद् हैं।

(७) निर्वाचन :- नगरीय निकायों के लिए वर्ष 2014- 15 में कराएं गए चुनाव में मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा 14 महापौरों, 273 अध्यक्षों, और 5487 पार्षदों के लिए चुनाव कराया गया था।

(८) प्रशासकीय व्यवस्था :- राज्य में नगरीय क्षेत्रों के विकास व उनके सुचारू संचालन के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग कार्यरत हैं।
यह विभाग नगर निगमों, नगर पालिकाओ, नगर पंचायतें आदि के माध्यम से नगरीय सुविधाएं प्रदान करता हैं।