डॉ. बशीर बद्र:- उर्दू शायरी में मध्यप्रदेश के शीर्ष शायर डॉ. बशीर बद्र को अपने साहित्यिक योगदान के लिए 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।
रचनाएं :- तुम्हारे लिए, ओंच।
Madypradesh-ke-lekhak-sahitykar-hindi--mp-gk-madhypradesh-ke-kavi-lekhak-sahitykar-in-hindi-wikipediya-

माधव राव सप्रे:- दमोह में जन्मे माधव राव, माखनलाल चतुर्वेदी को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे।1990 में छ: ग के प्रथम समाचार छ: ग मित्र का प्रकाशन किया। आगे चल कर नागपुर से हिंदी ग्रंथ माला शीर्षक नाम से कई ग्रंथ निकले।

मालती जोशी:- आपकी ख्याति साहित्यकार के रूप में हुई।
रचनाएं:- आकाशवाणी और दूरदर्शन से प्रकाशित होती रहती हैं।

जगदीश चतुर्वेदी:- आपकी प्रमुख़ रचना ' इतिहास हंता' हैं।

बालकवि बैरागी:- मंदसौर में जन्मे बालकवि बैरागी की साहित्यिक ख्याति पूरे देश में फैली है। आप भारत सरकार के मंत्री भी रह चुके है।
रचनाएं:- जूझ रहा हिंदुस्तानी, सरपंच, ललकार आदि।

चंद्रसेन विराट:- आपकी प्रमुख रचना स्वर के सुरपान, पीले चावल द्वार पर, कचनार की टहनी।

अशोक वाजपेई:- साहित्य में आपकी ख्याति तो थी ही, आप भारत सरकार के अधीन अच्छे प्रशासक भी रहे।
रचनाएं:- अब भी संभावना है, एक पतंग अन्नत में, कला विनोद आदि।

माणिक वर्मा:- आपकी ख्याति व्यंग, हास्य कवि के रूप में हुई।
रचनाएं:- महाभारत अभी जारी है, आदमी और बिजली का खम्मबा।

नरेश मेहता:- ज्ञानपीठ से सम्मानित मेहताजी ने संप्रिती चोथा संसार नामक समाचार पत्र का संपादन किया।

डॉ अजीज राय जादा:- भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए आपकी ख्याति एक लेखक, संस्कृति के संरक्षक, पूरातत्वविद के रूप में रहीं।

अनवारे इस्लाम:- ग़ज़ल गायक के रूप में, फ़िल्म समीक्षक के रूप में आपकी ख्याति फैली।
रचनाएं:- बादल आए पानी लाए, स्वागत, सारी दुनिया दंग हैं।

अमृत लाल आकिंचन:- कहानीकार और समालोचक के रूप में आपकी ख्याति हुई।
रचनाएं:- धर्म युग!

अर्चना अंजुम:- आपकी ख्याति गीतकार और शायर के रूप में हुई। आपके लिखे गीत फ़िल्मों में लिए गए हैं।

नरेंद्र चंचल:- व्यंग्यात्मक कविता और नाटककार के रूप में आपको ख्याति प्राप्त हुईं।
रचनाएं:- अनदेखे रास्ते, शब्द तो गाएगा, विजय ध्वनि, आस्था के गीत।

बिट्ठल भाई पटेल:- ख्याति कवि और राजनीतिज्ञ के रूप में रहीं। आपके लिखे गीत कई फिल्मों में फिल्माए गए।
रचनाएं:- दीवारों के ख़िलाफ़, प्यासे होंठ, अंत नहीं आएग।

श्रीपाल जैन:- देश प्रेम में आपकी ख्याति राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची।
रचनाएं:- भारत देश महान हैं, अमृत, रूप और रूप मंजरी।

प्रमुख लोक कवि

(१) संत सिंगाजी :-आपको निमाड़ का कबीर कहा जाता हैं। आपका जन्म बड़वानी जिले में हुआ। आप निर्गुण ब्रह्म के परम उपासक थे।आपने गुरु शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाया।
आपके प्रमुख शिष्य - खेमदास, प्लुदास, रंकदस्व,। आज भी निमाड़ अंचल में संत सिंगाजी की गादिया प्रचलित हैं, जिन पर आसीन होने वाले व्यक्ति साद कहलाते हैं।

(२) जगनिक:- बुदेलखंड के प्रमुख कवि जगनीक, कालिजर नरेश परिमल देव के दरबारी कवि थे। आपको प्रथ्विराज चौहान और मोहम्मद गौरी तथा उस समय के राजनीतिक घटना क्रम के बारे में जानकारी थीं।

(३) ईसुरी:- आपको बुंदेलखण्ड का जयदेव कहा जाता हैं।
रचनाएं:- ईसुरी की फागे नाम से प्रसिद्ध हैं।

प्राचीनकाल के कवि

(१) कालिदास:- महाकाल की नगरी उज्जैनी में जन्म हुआ। विक्रमादित्य (चन्द्रगप्त- द्वितीय) में आप प्रमुख दरबारी थे। भारत के शेक्सपियर और कवि कुल गुरु नाम से प्रसिद्ध हैं।
आपने कुल 7 ग्रंथो 
रघुवंशम, कुमारसम्भवम्- महाकाव्य, मालविकाग्निमित्रम, विक्रमोर्वर्शियम, अभिज्ञानशकुन्तलम- नाटक, ऋतु संहार, मेगदूत- खंडकाव्य।
कुमारसंभव में - शिव, पार्वती पुत्र कार्तिकेय तथा तारकासुर राक्षस के मध्य होने वाले युद्ध का विवरण हैं।

रघुवंशम् में - राजाराम और उनके पूर्वक दिलीप तथा अन्य का वर्णन है।

मालविकाग्निमित्रम - शुंग वंश के शासक अग्नि मित्र व उसकी रानी मालविका का प्रेम प्रसंग हैं।

विक्रमोर्वर्शियम में- राजा पुरूरुवा व उर्वशी का वर्णन हैं।

अभिज्ञानशकुन्तलम में- दुष्यंत व शकुंतला से उत्पन्न पुत्र भरत का वर्णन है।

ऋतु संहार में- 6 ऋतुओं का वर्णन हैं।

मेगदूत में - कुबेर द्वारा निष्कासित यक्ष- यक्षीणी का वर्णन हैं।

(२) बाणभट्ट :- हर्ष वर्धन के राजकवी थेहर्षचरित,कादंबरी,
चंडी शतक आदि रचनाएं है।

(३) भवभूति :- कन्नौज के शासक यशोवर्मन के आप राजदरबारी थे।

(४) भृतहरी :- लौकिक ग्रंथो में मिलता हैं।की आप चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के बड़े भाई थे। और कहरुर के युद्ध में हुनों को पराजित किया। नितिशतक, वैराग्य शतक, श्रंगार शतक इन तीनों ग्रंथो को शतकत्रयी, कहा जाता हैं।
अन्य रचनाएं :- वाक्य प्रदिप्ती, योग्य प्रदिप्ती।