मालवा के परमार अपनी उत्पत्ति अग्नि कुंड से मानते | लोक श्रुतियो एवं पृथ्वी राज चौहान के राजकवि चंदबरदाई के  अनुसार परशुराम द्वारा पृथ्वी के सभी क्षत्रियो को नष्ट कर दिए जाने के पश्चात् ऋषियों ने अपनी एवं वैदिक धर्म की रक्षा के लिए आबू पर्वत पर यज्ञ संपन्न किया | जिसके फलत: चार चार चोल वंश उत्पन्न हुए |
जो चौहान ,परमार ,प्रतिहार एवं चालुक्य कहलाये |
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मलवा के परमार प्रारम्भ में राष्ट्रकूट के सामंत थे | इस वंश का संस्थापक उपेंद्र या कृष्ण राज था | परमारो के इतिहास का साधन का स्त्रोत पदमगुप्त द्वारा रचित ,"नवसहसांक चरित्र", है |
जिसके अनुसार बैरिसिंग -II के काल में राजधानी उज्जैनी से धार ले जायी गई  | इस वंश का स्वतंत्र संस्थापक "सीयक -II"था | इसी वंश में मुंज एक प्रतापी शासक हुआ |
जिसके समय से मालवा में स्वर्ण युग का आरंभ माना जाता है | उसने धार में मुंज सागर झील ,मांडू में मुंज सागर का निर्माण करवाया |
मुंज की हत्त्या चालुक्य शासक तैलप -II द्वारा कर दी गई | सिंधुराज के उपरांत ,सिंधुराज का पुत्र भोज गद्दी पर बैठा|

राजाभोज 
राजाभोज का शासनकाल लगभग 1000 ई.से 1055 ई. तक मालवा में रहा है | राजा भोज एक महान योध्दा भी था | राजा भोज को शौर्य, काव्य, ललितकलाओं ,के संरक्षक के रूप में ख्याति प्राप्त थी |
जन जनश्रुतियों में उज्जयिनी के प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य के पश्चात राजा भोज का नाम आता है | इन दोनों की अनेक रोमांचक कहानियां भारतीय जनसामान्य में प्रचलित है| ऐसा कहा जाता है कि भोपाल शहर का नाम इसी राजा के नाम पर पड़ा
भोपाल के नजदीक ग्राम भोजपुर का नाम भी इन्ही के नाम पर रखा गया | यहाँ के प्रसिद्ध शिवमंदिर का निर्माण भी इन्ही के द्वारा करवाया गया ,मन जाता है |
भोजपुर का वर्तमान जिर्ण-शीर्ण बांध जिसका निर्माण राजा भोज द्वारा करवाया गया | तथा यह कहा जाता है की इस झील में 100 जल स्त्रोतों से पानी आता है | इसके पानी को राजा भोज ने बांध निर्मित करके रोक दिया था |
इस विद्वान राजा ने विभिन्न विषयो पर 23 ग्रंथो की रचना की थी | उसके दरबार में धनपाल ,उवत ,आदि महान विद्वान थे उसने धार में संस्कृत पठन -पठान के लिए एक विद्यालय की स्थापना की | जिसे भोजशाला कहा जाता है |
राजाभोज स्वयं बहुत विद्वान थे| एवं सरस्वती के उपासक थे | उन्होंने धर्म ,साहित्य खगोल ,विद्या ,भवन निर्माण ,काव्य ,औषध ,शस्त्र आदि विषयो पर ग्रन्थ लिखे | सरस्वती-कंठाभरण उनकी प्रसिद्ध रचना है |
धार की भोजशाला आज भी राजाभोज के वैवभशाली अतीत की कहानी कहती हुई नजर आती है |